मंगलवार, 25 जनवरी 2011

आज़ादी नहीं आयी !

आज़ादी के गणतंत्र की वर्ष गांठ फिर आ गयी पर
आज़ादी नहीं आयी 

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जो अब बटबृक्ष बन रहा है।

आपको याद तो होगा ! अखलाक का मारा जाना ! तब के शहंशाह का डर ? इन आतताइयों के लिए ! हिम्मत और साहस का अंकुरण था। जो अब बटबृक्ष बन रहा है।...