किसी देश की पहचान उसकी कलाओं से होती है यही कलाएं उसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं जिसका उदाहरण भारत के हर युग में हमें देखने को मिलता रहा है इसका एक मूल्याङ्कन करने की यहाँ जुर्रत कर रहा हूँ।
भारत में स्वतंत्रता के पश्चात कलाओं के उत्थान के लिए किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं।
स्वतंत्रता के बाद (1947) भारतीय सरकार ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, कलाकारों को प्रोत्साहित करने और समकालीन कला को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत, नीतिगत और वित्तीय प्रयास किए। जिसके तहत अनेकों अकादमियों का गठन किया गया जो निम्नवत हैं -
1. राष्ट्रीय अकादमियों की स्थापना
स्वतंत्र भारत में कला को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख अकादमियाँ स्थापित की गईं:
• ललित कला अकादेमी (1954): दृश्य कलाओं (चित्रकला, मूर्तिकला आदि) के विकास के लिए। यह समकालीन भारतीय कला को प्रोत्साहित करती है, प्रदर्शनियाँ आयोजित करती है और कलाकारों को सहायता प्रदान करती है।50
• संगीत नाटक अकादेमी (1953): संगीत, नृत्य और नाटक (performing arts) के संरक्षण और प्रचार के लिए। यह उत्सव आयोजित करती है, शोध को सहायता देती है और कलाकारों को अनुदान प्रदान करती है।49
• साहित्य अकादेमी (1954): साहित्य के विकास के लिए, जो कलाओं के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा है।
ये अकादमियाँ संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करती हैं और राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देती हैं।48
2. संस्थानों और केंद्रों का विकास
• राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD): नाट्य कला के प्रशिक्षण और विकास के लिए।
• कलाक्षेत्र फाउंडेशन: पारंपरिक नृत्य और कला के संरक्षण के लिए।
• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA): कला, संस्कृति और बौद्धिक संसाधनों का संरक्षण।
• केंद्र सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT): स्कूलों में सांस्कृतिक शिक्षा और कलाकार प्रशिक्षण।
• पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (ASI): स्मारकों और प्राचीन कलाओं के संरक्षण के लिए।
3. योजनाएँ और वित्तीय सहायता
संस्कृति मंत्रालय की कई योजनाएँ कलाओं को समर्थन देती हैं:
• कला और संस्कृति संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता योजना: सांस्कृतिक कार्यक्रम, उत्पादन, प्रदर्शनियाँ और कार्यशालाओं के लिए अनुदान।
• वयोवृद्ध कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता: पेंशन और चिकित्सा सहायता।
• सीनियर/जूनियर फैलोशिप: उत्कृष्ट कलाकारों और शोधकर्ताओं को छात्रवृत्ति।
• टैगोर कल्चरल कॉम्प्लेक्स: सांस्कृतिक केंद्रों का निर्माण।
• ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम: भारतीय कलाओं का अंतरराष्ट्रीय प्रचार।3943
4. अन्य महत्वपूर्ण प्रयास
• राष्ट्रीय संग्रहालय और गैलरियाँ: नई दिल्ली का नेशनल म्यूजियम, राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी आदि।
• शिल्प और हस्तशिल्प विकास: खादी एवं ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प बोर्ड आदि के माध्यम से पारंपरिक कलाओं (मधुबनी, वारली आदि) को आर्थिक समर्थन।
• स्वतंत्रता के बाद की कला आंदोलन: प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप जैसी पहलें, जिन्हें सरकारी समर्थन मिला।
• शिक्षा में कला: NCERT और विश्वविद्यालयों के माध्यम से कला शिक्षा का समावेश।
• समारोह और उत्सव: भारत उत्सव, अंतरराष्ट्रीय कला मेला आदि।
प्रभाव
इन प्रयासों से भारतीय कला समकालीन और वैश्विक मंच पर पहुँची। कलाकारों जैसे एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रज़ा आदि को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। साथ ही, लोक कलाओं का संरक्षण और पुनरुत्थान हुआ।
राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी (National Gallery of Modern Art - NGMA)
भारत की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक है। यह आधुनिक और समकालीन भारतीय कला को संरक्षित करने, प्रदर्शित करने और प्रचारित करने का मुख्य केंद्र है।
स्थापना और इतिहास
• स्थापना: 29 मार्च 1954 को भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में की गई। यह स्वतंत्रता के बाद कलाओं के उत्थान के सरकारी प्रयासों का हिस्सा था।
• उद्घाटन: तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे।
• भवन: जयपुर हाउस (Jaipur House) में स्थित, जो 1936 में जयपुर के महाराजा के लिए बनाया गया था। यह इंडिया गेट के पास है और आठ एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।64
शाखाएँ: मुख्य गैलरी के अलावा मुंबई (1996) और बेंगलुरु में शाखाएँ हैं।
संग्रह
NGMA के पास 17,000 से अधिक कलाकृतियाँ हैं, जिनमें 2000+ कलाकारों के कार्य शामिल हैं। संग्रह 18वीं शताब्दी (1750 के आसपास) से वर्तमान समय तक फैला हुआ है।
प्रमुख कलाकार:
• राजा रवि वर्मा
• अबनिंद्रनाथ टैगोर
• रवींद्रनाथ टैगोर
• अमृता शेरगिल
• जामिनी रॉय
• नंदलाल बोस
• एम.ए.आर. चुगताई आदि।
कलाकृतियों के प्रकार: चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग, फोटोग्राफी, इंस्टॉलेशन आर्ट, डिजिटल आर्ट और सजावटी कलाएँ।63
गतिविधियाँ और उद्देश्य
• प्रदर्शनियाँ: स्थायी और अस्थायी प्रदर्शनियाँ, जो भारतीय कला के विकास को दर्शाती हैं (औपनिवेशिक काल से स्वतंत्र भारत तक)।
• शिक्षा और संरक्षण: कला संरक्षण प्रयोगशाला, संदर्भ पुस्तकालय और दस्तावेजीकरण केंद्र।
• कार्यशालाएँ और कार्यक्रम: कलाकारों, छात्रों और जनता के लिए।
• उद्देश्य: आधुनिक भारतीय कला को संरक्षित करना, जनता में जागरूकता फैलाना और समकालीन कलाकारों को मंच प्रदान करना।
NGMA संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और ललित कला अकादेमी के साथ समन्वय में रहता है। यह स्वतंत्र भारत में कला संस्थानों के विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।
[4:48 am, 4/7/2026] Dr.Lal Ratnakar: वेबसाइट: ngmaindia.gov.in पर भी जानकारी उपलब्ध है।
[4:49 am, 4/7/2026] Dr.Lal Ratnakar: ललित कला अकादेमी (Lalit Kala Akademi) की भूमिका भारतीय दृश्य कलाओं (visual arts) के संरक्षण, संवर्धन और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त राष्ट्रीय संस्था है।
स्थापना
• स्थापना: 1954 में (संगीत नाटक अकादेमी और साहित्य अकादेमी के साथ)।
• उद्देश्य: आधुनिक और समकालीन भारतीय कला को बढ़ावा देना, कलाकारों को प्रोत्साहन देना और राष्ट्रीय-सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना।
प्रमुख भूमिकाएँ और कार्य
1 कला का संरक्षण और संग्रह:
◦ राष्ट्रीय स्तर पर दृश्य कलाओं (चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक्स, फोटोग्राफी आदि) का संरक्षण।
◦ राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी (NGMA) और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय।
2 प्रदर्शनियाँ और उत्सव:
◦ त्रैवार्षिक (Triennial): अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध प्रदर्शनी, जिसमें विश्व भर के कलाकार भाग लेते हैं।
◦ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ और कला शिविर।
◦ युवा कलाकारों को मंच प्रदान करना।
3 कलाकारों को सहायता:
◦ छात्रवृत्तियाँ, फैलोशिप और अनुदान।
◦ वयोवृद्ध एवं आवश्यकता वाले कलाकारों के लिए सहायता।
◦ कला शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम।
4 प्रकाशन और शोध:
◦ कला संबंधी पुस्तकें, पत्रिकाएँ (जैसे Lalit Kala Contemporary) और कैटलॉग प्रकाशित करना।
◦ कला इतिहास, आलोचना और सिद्धांत पर शोध को प्रोत्साहन।
5 क्षेत्रीय केंद्र:
◦ नई दिल्ली (मुख्यालय) के अलावा लखनऊ, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और भोपाल में क्षेत्रीय केंद्र, जो स्थानीय कलाओं को बढ़ावा देते हैं।
6 अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
◦ विदेशी कलाकारों के साथ आदान-प्रदान, प्रदर्शनियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
समग्र प्रभाव
ललित कला अकादेमी ने स्वतंत्रता के बाद भारतीय कला को औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त कर आधुनिकता और समकालीनता की ओर अग्रसर किया। यह प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप जैसे आंदोलनों और कलाकारों (एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रज़ा, एफ.एन. सूजा आदि) को मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण रही।
यह अकादेमी न केवल कलाकारों का विकास करती है बल्कि जनसामान्य में कला के प्रति जागरूकता भी फैलाती है।
एक परिवर्तन साफ़ तौर पर दीखता है जो 2014 के बाद भारतीय कला के लिए बनायी गई योजनाओं में परिलक्षित होता है जो मूलचूल ढंग से पुराने कार्यों को स्थगित करने के लिए अनेकों नामों के परिवर्तन करके परिवर्तित कर दिया गया जो उसके पुरे लक्ष्य को हो प्रभावित किया है यथा - विकास में किए गए प्रमुख कार्य संस्कृति मंत्रालय, विभिन्न अकादमियों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से हुए हैं। इनमें विरासत संरक्षण, कलाकारों को समर्थन, डिजिटलीकरण और वैश्विक प्रचार पर विशेष जोर रहा है।
1. कला संस्कृति विकास योजना (Kala Sanskriti Vikas Yojana - KSVY)
यह एक छत्र योजना है जिसमें कई उप-योजनाएँ शामिल हैं:
• सांस्कृतिक समारोह और उत्पादन अनुदान (CFPG): सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और कलाकार प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता।
• अनुसूचित जाति के कलाकारों के लिए विशेष सहायता।
• वयोवृद्ध कलाकार पेंशन योजना।
• सेवा भोज योजना: धार्मिक/सांस्कृतिक स्थलों पर भोजन प्रसाद के लिए सहायता।94
2. विरासत संरक्षण और विकास
• HRIDAY योजना: विरासत शहरों (वाराणसी, अमृतसर आदि) के विकास के लिए।
• काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या राम मंदिर परिसर विकास — इनमें पारंपरिक कला, मूर्तिकला और वास्तुकला का पुनरुत्थान।
• स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाएँ: सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा, जिससे लोक कलाओं (मधुबनी, वारली, पटचित्र आदि) को आर्थिक समर्थन मिला।
• चोरी गए कलाकृतियों की वापसी: 2014 के बाद सैकड़ों प्राचीन कलाकृतियाँ भारत वापस लाई गईं।
3. डिजिटलीकरण और आधुनिकता
• अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav): स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और युवा कलाकारों को मंच।
• IGNCA और अन्य संस्थानों द्वारा दस्तावेजीकरण और डिजिटल आर्काइव।
• India Art, Architecture and Design Biennale (IAADB): समकालीन कला को बढ़ावा।
4. कलाकार समर्थन और शिक्षा
• स्कॉलरशिप और फैलोशिप: युवा और वरिष्ठ कलाकारों के लिए।
• ललित कला अकादेमी, संगीत नाटक अकादेमी आदि के कार्यक्रमों का विस्तार।
• Ek Bharat Shreshtha Bharat: विभिन्न राज्यों की कलाओं का आदान-प्रदान (जैसे काशी-तमिल संगमम)।
5. वैश्विक प्रचार
• International Yoga Day और सांस्कृतिक केंद्रों का विस्तार।
• Global Engagement Scheme: भारतीय कलाकारों को विदेशी मंचों पर भेजना।
• UNESCO के साथ अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (नृत्य, संगीत) का संरक्षण।
प्रभाव
इन कार्यों से पारंपरिक कलाओं का पुनरुत्थान, समकालीन कलाकारों को अवसर और सांस्कृतिक पर्यटन में वृद्धि हुई है। बजट में संस्कृति मंत्रालय को बढ़ता आवंटन इन प्रयासों को मजबूती देता रहा।
ये कार्य निरंतर चल रहे हैं। यदि आप किसी विशिष्ट योजना, क्षेत्र (जैसे दृश्य कला या लोक कला) या आंकड़ों पर अधिक जानकारी चाहें, तो बताएं!
[4:56 am, 4/7/2026] Dr.Lal Ratnakar: राष्ट्रीय विरासत मिशन मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन (National Mission on Monuments and Antiquities - NMMA) को संदर्भित करता है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
उद्देश्य
• भारत के सभी स्मारकों, पुरावशेषों (antiquities), निर्मित विरासत स्थलों और सांस्कृतिक संपदा का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना।
• दस्तावेजीकरण, संरक्षण और संवर्धन को व्यवस्थित करना।
• जन जागरूकता बढ़ाना और विरासत संरक्षण में सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
प्रमुख गतिविधियाँ
• दस्तावेजीकरण: स्मारकों की फोटोग्राफी, जीआईएस मैपिंग, विवरण तैयार करना।
• सूचीकरण: देश भर में लाखों पुरावशेषों और स्मारकों की सूची बनाना।
• संरक्षण: खतरे में पड़े स्मारकों की पहचान और सुरक्षा।
• डिजिटलीकरण: आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना।
उपलब्धियाँ (2024-26 तक)
• 1.84 लाख से अधिक निर्मित विरासत स्थलों और 17.20 लाख पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण किया गया।
• यह मिशन विरासत बचा और विकास (Virasat Bhi Vikas Bhi) की अवधारणा के अनुरूप कार्य करता है।
अन्य संबंधित मिशन
• राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (NFHM): 2015 में शुरू, सिनेमा विरासत (फिल्मों) का संरक्षण, पुनर्स्थापना और डिजिटलीकरण। NFAI (पुणे) द्वारा कार्यान्वित।
• HRIDAY योजना: विरासत शहरों का समग्र विकास।
यह मिशन संस्कृति मंत्रालय और ASI के प्रयासों का हिस्सा है, जो 2014 के बाद तेजी से आगे बढ़ा। इससे पुरातात्विक खोजों, पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव में वृद्धि हुई है। ये कार्य निरंतर चल रहे हैं, जैसे अमृत महोत्सव के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम। जिनमें बहुतेरे परिवर्तन चुपचाप कर दिए गए हैं जो समग्र संवैधानिक ढाँचे को प्रभावित करते है। हमारी सांस्कृतिक विरासत को प्रभावित करते हैं।
-डॉ लाल रत्नाकर
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