शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

श्रद्धांजलि सभा (अजय कुमार यादव 'बजरंगी')

जो 6 फरवरी 2026 को हमसब को छोड़कर चले गये :
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
जिस परिवार का सदस्य होने के नाते अपने सामने जिनको खोते हुए देखा है उनमें दादी पिताजी छोटा भाई और फिर उससे छोटा भाई उनसे पहले उनकी पत्नी। यह भी अजीब विडंबना है की परिवार में परिवार की जिस गरिमा और मर्यादा को इन लोगों ने उच्च स्थान दिया था उन्हीं लोगों ने उसे तोड़ डाला। 

प्रेमचंद जी ने अपनी बहुत सारी कहानियों में ऐसी घटनाओं का जिक्र किया है इससे साबित होता है कि यह सब कुछ एक दिन का नहीं है हमेशा होता आया है।यह कथन कि "घटनाएं एक दिन की नहीं, हमेशा से होती आई हैं," ऐतिहासिक और सामाजिक निरंतरता को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि कुप्रथाएं, संघर्ष, या मानवीय व्यवहार, जैसे कि भेदभाव या प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना, अचानक नहीं पैदा होते, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जो व्यवस्थागत समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। ऐतिहासिक निरंतरता: किसी भी समस्या या घटना को एकाएक नहीं, बल्कि लंबे समय की सामाजिक संरचनाओं के परिणाम के रूप में देखा जाता है।उदाहरण: सामाजिक मुद्दों, जैसे कि भेदभाव या किसी एक समुदाय के खिलाफ अत्याचार, यह बताते हैं कि यह कोई नई बात नहीं, बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही प्रथा है। प्रतिकूलता: जैसे कि बाढ़ के दौरान लोगों को ज़रूरी चीज़ें जुटाने के लिए मजबूर होना, या व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करने में कई प्रयास करना पड़ना, ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि यह सब हमेशा से ही होता आया है।  यह विचारधारा इस बात पर जोर देती है कि जब हम किसी विशिष्ट घटना पर बात करते हैं, तो हमें उस पूरी प्रक्रियाको समझना चाहिए जो उस घटना के लिए जिम्मेदार है ।


अजय कुमार यादव 'बजरंगी'
का आकस्मिक निधन 6 फरवरी 2026 को सायंकाल लगभग सात आठ बजे साम हो गया। यह खबर हमें शाम 8.30 बजे पूजा के फोन से पता चला आज सुबह ही मैं जौनपुर से ट्रेन से गाज़ियाबाद आया था। अब यह समय ऐसा था जो किसी भी तरह से ट्रेन जहाज से जाना संभव नहीं था इसलिए तय हुआ की अपनी कार से रात ही निकल लेते हैं। 
मैं पत्नी और संदीप संतोष रात में 10 बजे निकलकर सुबह साढ़े सात बजे गाव पहुँच गया अब घर पर अंतिम संस्कार के लिए तैयारी शुरू हो गयी लगभग एक घंटे में घर से निकलकर रामघाट के लिए निकल लिए बहार सड़क तक हमलोग आये और बहुत सारे लोग आये जिनमे श्री अजय यादव डिम्पल गावं के गेट पर आ गए वह हमारे साथ घाट तक साथ रहे। 
बचपन :
अजय कुमार यादव (बजरंगी ) 0 1 जनवरी 1965 डॉ रमापति और श्रीमती मत्ती के तीसरे पुत्र के रूप में को इनका जन्म हुआ जबकि (यह चौथे पुत्र थे ) 1. डॉ.लाल रत्नाकर (लाल साहब)  2 . राय साहब (बचपन में ही इनका निधन हो गया ) 3 .अशोक कुमार यादव (गुलाब ) (अल्प आयु की अवधि में सड़क दुर्घटना में इनका निधन जब यह जौनपुर में राजकीय बालिका विद्यालय में प्राध्यापक थे उस समय हो गया था। 
शिक्षा :
अजय कुमार यादव (बजरंगी ) की शिक्षा इंटरमीडिएट के बाद बी ए में प्रवेश लिए लेकिन पढ़ाई आगे नहीं किये वह अब बड़े हो गए थे इनकी रूचि सामाजिक एवं कृषि कार्यों में पिता जी के साथ सहयोगी के रूप में बढ़ी फिर यह मुंबई गए और वहां कुछ रिश्तेदारों के साथ ड्राइवर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। 
कैरियर :
यह मुंबई गए और वहां कुछ रिश्तेदारों के साथ ड्राइवर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। तत्कालीन परिस्थितियों में यह एक अच्छे ड्राइवर हो गए थे। हालांकि यह बात हमेशा कष्टकारी रहेगी की यह अपने इस उद्यम के साथ परिवार में मझोले चचा के संपर्क और उनको महत्त्व देते रहे तथा उनके जल में फास गए जो समय समय पर बम्बई जाते रहे रहे और आर्थिक शोषण करते रहे ऐसा उनके आचरण और बेईमानी के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। 
यह यही वक़्त था जब इनके साथी अपनी ट्रकें खरीद रहे थे और व्यवसाय को खड़ा कर रहे थे लेकिन यह उसी चाचा के हाथ की कठपुतली की तरह लूट और बर्वाद हो रहे थे। 
कैरियर में बदलाव :
यह यही वक़्त था जब इनके साथी अपनी ट्रकें खरीद रहे थे और व्यवसाय को खड़ा कर रहे थे लेकिन यह उसी चाचा के हाथ की कठपुतली की तरह लूट और बर्वाद हो रहे थे। यही कारण था की इनका इस क्षेत्र में मन उचट रहा था धीरे धीरे यह गांव की और मुखातिब हुए मुझे एक घटना याद है तब मैं गाजियाबाद के कालेज में पहुँच गया और एक आवास ले रहा था जिसके लिए चचा को आर्थिक सहयोग के लिए आग्रह किया तब उन्होंने इनके साथ फोन पर यह राय दिए की वहां घर लेने की क्या जरुरत है कौन आर्थिक सहयोग करता यह उलटे उनकी हाँ में हाँ मिलते हुए बहुत ही निराश किये। 
और उसके पैसे से यहाँ ऊंट पटांग निर्माण के नाम पर लूट रहे थे। 



गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार



















ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार  के बारे में :
"**ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार**" यह वाक्यांश मुख्य रूप से सामाजिक-राजनीतिक और विरोधी विमर्श में इस्तेमाल होता है, खासकर उन लोगों द्वारा जो ब्राह्मणवाद को जाति व्यवस्था, वर्णाश्रम, मनुवाद और सामाजिक असमानता का मूल कारण मानते हैं।

यह एक प्रतीकात्मक/व्यंग्यात्मक/उत्तेजक नारा है, जिसका मतलब होता है कि ब्राह्मणवाद (जिसे वे शोषणकारी व्यवस्था मानते हैं) को पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए, जैसे किसी मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार (दाह-संस्कार) कर दिया जाता है। यह विचार **डॉ. भीमराव अंबेडकर** के लेखन से प्रेरित माना जाता है, जहां उन्होंने ब्राह्मणवाद को खत्म करने की बात कही थी (हालांकि ठीक ये शब्द उनके मूल में नहीं मिलते, लेकिन उनका सार यही था कि ब्राह्मणवाद को जड़ से मिटाना चाहिए)।

आजकल सोशल मीडिया (फेसबुक, X / ट्विटर, इंस्टाग्राम) पर यह वाक्य बहुत इस्तेमाल होता है, जैसे:
- "ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार निश्चित है"
- "ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार कर दो"
- बहुजन/दलित-बहुजन आंदोलनों में यह एक आम स्लोगन बन गया है, जो जातिवाद विरोध को व्यक्त करता है।

कुछ लोग इसे ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा फैलाने वाला बताते हैं, जबकि इस्तेमाल करने वाले इसे **व्यवस्था** (ideology) के खिलाफ मानते हैं, न कि व्यक्तिगत ब्राह्मणों के।

अगर आपका मतलब हिंदू धर्म के पारंपरिक **अंतिम संस्कार** (अंत्येष्टि) से है, जिसमें ब्राह्मण पुरोहित की भूमिका होती है (जैसे तेरहवीं पर ब्राह्मण भोज, पिंडदान आदि), तो वो अलग विषय है। लेकिन आपका प्रश्न "ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार" से लगता है कि आप इसी राजनीतिक/विरोधी संदर्भ की बात कर रहे हैं।
अगर आप किसी खास किताब, नेता या घटना के संदर्भ में पूछ रहे हैं, तो और डिटेल बताएं तो बेहतर समझा सकूंगा।

**डॉ. भीमराव आंबेडकर के ब्राह्मणवाद विरोधी विचार**  
बहुत स्पष्ट, गहरे और व्यवस्थित रूप से लिखे गए विचार

डॉ. आंबेडकर **ब्राह्मणवाद** को **भारतीय समाज की सबसे बड़ी बीमारी** मानते थे।  
उनका कहना था कि **ब्राह्मणवाद** और **व्यक्तिगत ब्राह्मण** में बहुत बड़ा फर्क है।

### सबसे महत्वपूर्ण उद्धरण — ब्राह्मणवाद की परिभाषा

**"ब्राह्मणवाद से मेरा अभिप्राय स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के इन्कार से है।**  
 उस अर्थ में यह सभी वर्गों में मौजूद है, सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है,  
**हालांकि ब्राह्मण ही इसका जनक हैं।"**  
— डॉ. आंबेडकर  
(मजदूर वर्ग के सामने दो दुश्मन — ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद)

### डॉ. आंबेडकर ने ब्राह्मणवाद को बार-बार किस रूप में देखा?

| क्र.सं. | विचार / उद्धरण | किताब/संदर्भ | मुख्य बात |
|--------|-----------------|---------------|-----------|
| 1      | ब्राह्मणवाद = **स्वतंत्रता, समानता, बंधुता का निषेध** | कई जगह (सबसे प्रसिद्ध) | ब्राह्मणवाद विचारधारा है, जाति/व्यक्ति नहीं |
| 2      | **"मैं ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं हूँ, मैं ब्राह्मणवाद के खिलाफ हूँ"** | 1 जुलाई 1927, महाड सत्याग्रह के समय | बहुत बार दोहराया |
| 3      | **भारतीय इतिहास = बौद्ध धर्म और ब्राह्मणवाद के बीच घातक संघर्ष** | Revolution & Counter-Revolution in Ancient India | पूरा प्राचीन इतिहास इसी द्वंद्व से समझा जा सकता है |
| 4      | अगर **हिंदू राज** बना तो देश के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा | पाकिस्तान या भारत का विभाजन (1940) | क्योंकि यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था को स्थापित करेगा |
| 5      | **ब्राह्मणवाद ने वर्ण को जाति में बदला** — यह सबसे बड़ा स्वार्थपूर्ण कार्य था | प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति | जन्म आधारित श्रेष्ठता को स्थायी करना |
| 6      | **मनुस्मृति = ब्राह्मणवाद का प्रतिक्रांति का गॉस्पेल (सुसमाचार)** | Riddles in Hinduism + अन्य | सबसे घातक कानून संहिता |
| 7      | ब्राह्मणवाद ने **शूद्रों-अतिशूद्रों और स्त्रियों** को सदियों तक नारकीय जीवन दिया | कई लेखन | मुख्य शिकार यही तीन वर्ग रहे |

### आंबेडकर ने ब्राह्मणवाद को कहाँ-कहाँ सबसे ज्यादा खतरनाक बताया?

1. **जाति व्यवस्था का जनक और संरक्षक**
2. **लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन**  
   (क्योंकि लोकतंत्र की नींव = स्वतंत्रता, समानता, बंधुता)
3. **मजदूर वर्ग का सबसे बड़ा शत्रु** (पूंजीवाद के साथ)
4. **महिलाओं के दमन का मूल स्रोत**
5. **बौद्ध क्रांति को कुचलने वाली प्रतिक्रांति**

### बहुत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जो अक्सर भुला दिया जाता है

डॉ. आंबेडकर बार-बार कहते थे:

> **"मेरी लड़ाई ब्राह्मण से नहीं, ब्राह्मणवाद से है।"**  
> **"ब्राह्मण कितना भी उदार हो जाए, वह ब्राह्मणवाद नहीं छोड़ेगा।"**  
> (क्योंकि यह उसकी विचारधारा, पहचान और विशेषाधिकार का आधार है)

### सारांश में डॉ. आंबेडकर का मुख्य संदेश

- ब्राह्मणवाद **एक विचारधारा** है  
- यह **जन्म-आधारित श्रेष्ठता**, **असमानता**, **अछूतपन** और **स्त्री-दमन** की विचारधारा है  
- यह **किसी एक जाति तक सीमित नहीं** — कई गैर-ब्राह्मण भी इसे अपनाए हुए हैं  
- लेकिन **ऐतिहासिक रूप से ब्राह्मण ही इसके मूल जनक और सबसे बड़े संरक्षक** रहे हैं  
- **इसका अंतिम नाश** ही भारत में सच्ची स्वतंत्रता, समानता और बंधुता ला सकता है

यही कारण है कि आज भी **"ब्राह्मणवाद का अंतिम संस्कार"** जैसा नारा बहुजन आंदोलन में बहुत प्रचलित है।

आपको किसी विशेष किताब/उद्धरण/घटना के बारे में और विस्तार से जानना है तो जरूर बताइए।


**पेरियार (ई.वी. रामासामी नायकर) के विचार**  
पेरियार (17 सितंबर 1879 – 24 दिसंबर 1973) दक्षिण भारत (खासकर तमिलनाडु) के सबसे बड़े **क्रांतिकारी समाज सुधारक**, **तर्कवादी**, **नास्तिक** और **ब्राह्मणवाद विरोधी** नेता थे। उन्हें **"द्रविड़ आंदोलन का पिता"**, **"आत्म-सम्मान आंदोलन के संस्थापक"** और **"दक्षिण एशिया का सुकरात"** (यूनेस्को द्वारा) कहा जाता है।

उनके विचार मुख्य रूप से **जाति उन्मूलन**, **ब्राह्मणवाद का विरोध**, **महिला अधिकार**, **तर्कवाद/नास्तिकता**, **द्रविड़ अस्मिता** और **समाज में समानता** पर केंद्रित थे।

### पेरियार के मुख्य विचार और सिद्धांत (तालिका में सारांश)

| क्र.सं. | मुख्य विचार/क्षेत्र                  | पेरियार का मूल संदेश                                                                 | प्रभाव/उद्देश्य |
|--------|-------------------------------------|-------------------------------------------------------------------------------------|-----------------|
| 1      | **ब्राह्मणवाद विरोध**              | ब्राह्मणवाद = जाति व्यवस्था, वर्णाश्रम, आर्य श्रेष्ठता और असमानता की विचारधारा। यह हिंदू धर्म का मूल है। | ब्राह्मणवाद का अंत = सच्ची समानता की शुरुआत। व्यक्तिगत ब्राह्मणों से नहीं, विचारधारा से विरोध। |
| 2      | **जाति व्यवस्था का घोर विरोध**      | जाति = ब्राह्मणों द्वारा बनाई गई शोषण की व्यवस्था। शूद्र और दलित मूल निवासी (द्रविड़) हैं, आर्य आक्रमणकारी। | जाति उन्मूलन के बिना कोई सुधार संभव नहीं। |
| 3      | **नास्तिकता और तर्कवाद**            | ईश्वर, धर्म, शास्त्र, पुराण, देवी-देवता सब झूठ और शोषण के साधन। "ईश्वर नहीं है, नहीं है!" | अंधविश्वास, कर्मकांड, मूर्तिपूजा का बहिष्कार। विज्ञान और तर्क को अपनाओ। |
| 4      | **आत्म-सम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement)** | 1925 में शुरू। उद्देश्य: गैर-ब्राह्मणों (द्रविड़) में आत्म-सम्मान जगाना, ब्राह्मण पुरोहितों से मुक्ति। | सेल्फ-रिस्पेक्ट मैरिज (बिना पुरोहित के विवाह), महिलाओं को बराबरी। |
| 5      | **महिला अधिकार और पितृसत्ता विरोध** | महिलाएं पुरुषों के बराबर। बाल विवाह, देवदासी प्रथा, विधवा दमन का विरोध। | महिलाओं को संपत्ति, तलाक, शिक्षा का अधिकार। पितृसत्ता = ब्राह्मणवाद का हिस्सा। |
| 6      | **द्रविड़ अस्मिता और आर्य विरोध**   | द्रविड़ (तमिल/दक्षिण भारतीय) मूल निवासी, आर्य (उत्तर भारतीय ब्राह्मण) आक्रमणकारी। | द्रविड़ नाडु (अलग देश) की मांग, हिंदी विरोध। |
| 7      | **हिंदू धर्म/ग्रंथों का विरोध**     | मनुस्मृति, रामायण, गीता आदि शोषणकारी। राम को ब्राह्मणों का नायक माना, रावण को द्रविड़ नायक। | हिंदू ग्रंथ जलाए, मूर्तियां तोड़ीं (प्रतीकात्मक विरोध)। |

### पेरियार के कुछ प्रसिद्ध उद्धरण (मुख्य ब्राह्मणवाद विरोधी)

- "मैं ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं, ब्राह्मणवाद के खिलाफ हूँ।" (ब्राह्मणवाद = विचारधारा, व्यक्ति नहीं)
- "मैंने सब कुछ किया। मैंने गणेश आदि सभी ब्राह्मण देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़ डालीं। राम आदि की तस्वीरें भी जला दीं।"
- "दुनिया के सभी संगठित धर्मों से मुझे सख्त नफरत है।"
- "शास्त्र, पुराण और उनमें दर्ज देवी-देवताओं में मेरी कोई आस्था नहीं है, क्योंकि वो सारे के सारे दोषी हैं। मैं जनता से उन्हें जलाने तथा नष्ट करने की अपील करता हूं।"
- "द्रविड़ कड़गम आंदोलन का केवल एक ही निशाना है: आर्य ब्राह्मणवादी और वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना।"
- "ईश्वर की सत्ता स्वीकारने में किसी बुद्धिमत्ता की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन नास्तिकता के लिए बड़े साहस और दृढ़ विश्वास की जरूरत पड़ती है।"


### पेरियार की विरासत आज
- तमिलनाडु में **DMK**, **AIADMK** जैसी पार्टियां उनके विचारों से प्रभावित।
- बहुजन/दलित आंदोलनों में "जय भीम जय पेरियार" का नारा आम।
- उनके विचार आज भी **जातिवाद**, **हिंदुत्व**, **पितृसत्ता** के खिलाफ सबसे तेज हथियार माने जाते हैं।
- विवाद: कुछ लोग उन्हें ब्राह्मण-विरोधी (anti-Brahmin) कहते हैं, लेकिन वे बार-बार स्पष्ट करते थे कि विरोध **ब्राह्मणवाद** (ideology) का है, न कि व्यक्तिगत ब्राह्मणों का।

पेरियार का मूल संदेश: **समाज में कोई ऊँच-नीच नहीं, कोई ईश्वर नहीं, कोई शास्त्र नहीं — सिर्फ इंसान और इंसानियत**।

अगर आप उनके किसी खास विचार (जैसे महिला अधिकार, द्रविड़ नाडु, या कोई उद्धरण) पर और गहराई से जानना चाहें, तो बताइए!

गुरु-शिष्य परंपरा, वर्ण व्यवस्था और सामाजिक समानता पर विचार

गुरु-शिष्य परंपरा, वर्ण व्यवस्था और सामाजिक समानता पर विचार https://www.youtube.com/watch?v=grDhDOxHqCQ नमस्ते! आपका प्रश्न और चिंता बहुत गह...