सोमवार, 16 सितंबर 2013

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को निवेदित पत्र

मेरा मानना है की बिना परिश्रम के प्राप्त मूल्य /सम्मान संपदा सत्ता की कोई परवाह नहीं होती, माया मुलायम और उनके पुत्र के साथ कुछ ऐसा ही है -

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जो अब बटबृक्ष बन रहा है।

आपको याद तो होगा ! अखलाक का मारा जाना ! तब के शहंशाह का डर ? इन आतताइयों के लिए ! हिम्मत और साहस का अंकुरण था। जो अब बटबृक्ष बन रहा है।...