मंगलवार, 4 सितंबर 2012

कांग्रेस ने ओबीसी के लिए भी आरक्षण की मांग की


प्रोन्नति में कोटे को हरी झंडी

Sep 04, 12:31 pm
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। कोयला ब्लॉक आवंटन में चौतरफा घिरी सरकार ने आरक्षण का दांव खेल दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी नौकरियों की प्रोन्नति में भी अनुसूचित जाति [एससी] और अनुसूचित जनजाति [एसटी] को आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल को मंगलवार को हरी झंडी दे दी। सरकार बुधवार को ही इस विधेयक को राज्यसभा से पारित कराने की कोशिश में है। हालांकि सपा के विरोध के कारण आशंकाएं बरकरार हैं।
संविधान के अनुच्छेद 16 [4] में संशोधन किए जाने को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही राजनीति भी शुरू हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती व कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया, लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान समेत एससी/एसटी समुदाय के दूसरे सांसदों ने खुशी जाहिर की है। मायावती ने अपने सांसद सतीशचंद्र मिश्र के साथ राजग नेताओं खासकर भाजपा के सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से मिलकर विधेयक को इसी सत्र में पारित कराने के लिए मदद मांगी है। इतना ही नहीं, सपा व गैर एससी/एसटी सांसदों के विरोध को देखते हुए माया ने पिछड़े समुदाय को भी नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण का प्रावधान इसी विधेयक में किए जाने की पैरवी कर दी है। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार बिल पारित कराने के लिए कटिबद्ध है। बुधवार को राज्यसभा में दोपहर 12 बजे या फिर दो बजे बिल पेश किया जाएगा।
पासवान ने भी कहा कि यह विधेयक पारित होते ही ओबीसी के लिए भी ऐसा ही बिल लाया जाए तथा अगड़ी जातियों के गरीबों के लिए आरक्षण का इंतजाम किया जाए, लेकिन मामला इतना आसान नहीं है। सपा ने विधेयक के विरोध का एलान कर दिया है। सपा प्रवक्ता प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा, 'जिस मामले को सुप्रीम कोर्ट चार बार खारिज कर चुका हो, उसे पलटने के लिए संविधान संशोधन का कदम प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। हम पहले भी इसके विरोध में थे। वह अब भी संसद के भीतर और बाहर जारी रहेगा।'
दूसरे दलों में भी इस मुद्दे पर अंदरूनी मतभेद है। माना जा रहा है कि ऐसे दल चुप होकर स्थिति को देखेंगे। भाजपा की परेशानी यह है कि अगर वह कोयला ब्लॉक को लेकर विरोध बरकरार रखती है और संसद बाधित होती है तो ठीकरा उसके सिर फूटेगा। और शांत रहती है तो माना जाएगा कि कोयले पर उनका विरोध खत्म हो गया है। इतना तय है कि पार्टी विधेयक का विरोध नहीं करेगी।
बताते हैं कि संशोधन के बाद संविधान के अनुच्छेद 16 व 335 प्रोन्नति में आरक्षण में बाधा नहीं बनेंगे। इस मामले में 19 अक्टूबर, 2006 को दिया गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो जाएगा। केंद्रीय नौकरियों में उनके लिए आरक्षण का लाभ प्रोन्नति में तो मिलेगा ही, जबकि राज्यों की नौकरियों में यह उनकी आबादी के लिहाज से परिणामी ज्येष्ठता [कांसीक्वेंशियल सीनियारिटी] के आधार पर प्रोन्नति मिल सकेगी।
प्रोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की शर्ते
1-प्रोन्नति में कांसीक्वेंशियल सीनियारिटी का फायदा [आरक्षण] तभी मिल सकता है, जब एससी/एसटी का समुचित प्रतिनिधित्व न हो।
2-नौकरियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के पिछड़ेपन का समुचित डाटा उपलब्ध हो।
3-इससे प्रशासनिक दक्षता न प्रभावित नहीं होती हो।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

एकात्म मानवतावाद

कुछ विद्वान मित्रों का मानना है कि भाजपा की तरफ आम लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है और वह इसलिए कि उन लोगों के मन में उनमें  हिंदू होने का म...