बुधवार, 13 जून 2012

केंद्र सरकार को झटका


अल्पसंख्यक आरक्षण: हाईकोर्ट के फैसले पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

 बुधवार, 13 जून, 2012 को 12:43 IST तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के लिए अलग से 4.5 प्रतिशत आरक्षण को संविधान और कानून के हिसाब से सही नहीं बताया है
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़े वर्गों के 27 प्रतिशत आरक्षण में से धार्मिक अल्पसंख्यकों को 4.5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था को खारिज करने वाले आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार को झटका लगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 27 प्रतिशत आरक्षण में से ही अल्पसंख्यकों के लिए इस वर्ष जनवरी से 4.5 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का सरकार का फैसला प्रथम दृष्टया संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नजर नहीं आता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग की तरह, अल्पसंख्यकों के लिए अलग से 4.5 प्रतिशत आरक्षण किसी कानून के हिसाब से भी नहीं मुनासिब नहीं लगता है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अन्य पिछड़ा वर्गों के छात्रों को आईआईटी में अब 443 सीटें और मिलेंगी जिन्हें 4.5 प्रतिशत आरक्षण की बुनियाद पर अल्पसंख्यकों के लिए अलग रख दिया गया था.
आईआईटी संस्थानों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग का बुधवार को आखिरी दिन है.

शुक्रवार, 1 जून 2012

बिहार में फिर शुरू हो सकता है खूनी संघर्ष!


ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या, बिहार में फिर शुरू हो सकता है खूनी संघर्ष!
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:01-06-12 05:00 PM
Last Updated:01-06-12 05:27 PM
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रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद बिहार में एक बार फिर से खूनी संघर्ष शुरू होने की आशंका घिरने लगी है। आरा जिले में मुखिया की हत्या के बाद 80 के दशक में जो खूनी खेल ठाकुर और नक्सलियों में शुरु होकर 90 तक चला था, उस जातीय युद्ध के बीज अब फिर से पकने लगे हैं।
राज्य में 90 के दशक में हुए कई नरसंहारों में रणवीर सेना का हाथ माना जाता है। हाल ही में ब्रह्मेश्वर सिंह को बथानी टोला नरसंहार मामले में बाइज्जत बरी कर दिया गया था। हालांकि हाई कोर्ट के इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई भी थी।
जानकारों का कहना है कि ब्रह्मेश्वर की हत्या बथानी में किए गए नरसंहार का बदला है। ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया बिहार का जाना माना नाम है और वो रणवीर सेना के कारण चर्चा में आए थे। कई संगीन अपराधों में शामिल सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह हाल ही में जेल से रिहा हुये थे।
जेल से निकलने के साथ ही किसानों के लिए एक संगठन की स्थापना भी की थी जो किसानों के हित के लिए संघर्ष करता। लेकिन मुखिया की हत्या की इस घटना के बाद से ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं फिर से बिहार में खूनी संघर्ष का दौर ना शुरू हो जाए।
उधर बथानी नरसंहार में बरी किए जाने के खिलाफ माले भी लगातार धरना प्रदर्शन कर रहा था। आरा में पिछले 26 मई से धरना पर बैठे माले के पूर्व विधायक सुदामा प्रसाद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने ये कदम उनकी सुरक्षा के कारण उठाया है।
जानिए आखिर कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया!
बिहार की जातिगत लड़ाइयों का एक चर्चित चेहरा थे ब्रह्मेश्वर मुखिया। बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा। इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी।
सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारों की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी।
1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही जमानत दी गई थी।
ब्रह्मेश्वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था। उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया।
इन आरोपों को जांच के लिए लिए जो अमीरदास आयोग बनी थी उसे जनवरी 2006 में भंग कर दिया गया था। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए किया था।
बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा।
आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी। इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी।
11 जुलाई 1996 के दिन रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी।
वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद रणवीर सेना ने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया।
रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है।
25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गई।
इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी, इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे।
ब्रह्मेश्वर मुखिया के जिस्म पर हमलावरों ने दागी 40 गोलियां
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान
First Published:01-06-12 03:04 PM
Last Updated:01-06-12 05:01 PM
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बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक माने जाने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की अज्ञात हमलावरों ने शुक्रवार तड़के गोली मारकर हत्या कर दी। वे सुबह चार बजे टहलने के लिए निकले थे, तभी पहले से घात लगाए अज्ञात अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने उनके शरीर में लगभग 40 गोलियां दागी और फरार हो गए।

हत्या के बाद से आरा में रणवीर सेना समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। जगह-जगह आगजनी और तोड़फोड़ की सूचना है। आरा के कतिरा थाना क्षेत्र में जहां पर मुखिया की हत्या हुई है वहां पर स्थित हरिजन छात्रावास में आग लगा दी गई है।
इसके अलावा सर्किट हाउस में भी आगजनी और तोड़फोड़ की सूचना है। आरा प्रशासन ने हालात को काबू में रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिख रहा है। पूरे बिहार में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की निंदा करते हुए शुक्रवार को इस घटना की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
     
पासवान ने कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की सीबीआई से जांच होनी चाहिए। उनकी हत्या की घटना निंदनीय है। लोकतंत्र में हिंसा को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
बिहार की जातिगत लड़ाइयों का एक चर्चित चेहरा थे ब्रह्मेश्वर मुखिया। बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा। इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी।
सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारों की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी।
1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही जमानत दी गई थी।
ब्रह्मेश्वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था। उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया।
इन आरोपों को जांच के लिए लिए जो अमीरदास आयोग बनी थी उसे जनवरी 2006 में भंग कर दिया गया था। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए किया था।
बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा।
आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी। इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी।
11 जुलाई 1996 के दिन रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी।
वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद रणवीर सेना ने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया।
रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है।
25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गई।
इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी, इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे।
गौरतलब है कि ब्रह्मेश्वर पर राज्य सरकार ने पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। उसे 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्जीबिशन रोड से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। करीब नौ वर्ष बाद ब्रह्मेश्वर 10 जुलाई 2011 को न्यायालय के आदेश के बाद जेल से बाहर आया।
जेल से बाहर आने के बाद पांच मई 2012 को ब्रह्मेश्वर ने भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से एक संगठन बनाया और कहा कि अब वह किसानों की हित की लड़ाई एक बार फिर लड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्मेश्वर के साक्ष्य के अभाव में अधिकांश मामलों में बरी हो जाने के बाद वर्तमान सरकार पर भी उसकी मदद करने का आरोप लगने लगा था।
जातीय संघर्ष का प्रमुख नाम था ब्रह्मेश्वर मुखिया
पटना, एजेंसी
First Published:01-06-12 02:28 PM
Last Updated:01-06-12 04:37 PM
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बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम जातीय संघर्ष में प्रमुखता से लिया जाता है। ब्रह्मेश्वर की शुक्रवार सुबह चार बजे आरा जिले के कतिरा मुहल्ले में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
रणवीर सेना ऊंची जातियों का संगठन माना जाता रहा है। बिहार में जातीय संघर्ष के दौर में ऊंची जाति के लोगों ने अपने हितों की लड़ाई लड़ने के लिए सितम्बर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में रणवीर सेना का गठन आरा के पेलाउर गांव में किया था। धीरे-धीरे इस संगठन का वर्चस्व भोजपुर, बक्सर, औरंगाबाद, गया, भभुआ, पटना सहित कई जिलों में हो गया।
बिहार में कई नरसंहारों में रणवीर सेना का हाथ माना जाता रहा है। ब्रह्मेश्वर के नेतृत्व वाली इस सेना पर पहली बार 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा गांव में पांच दलितों की हत्या का आरोप लगा। कालांतर में इस संगठन की खूनी भिड़ंत नक्सली संगठनों से होने लगी। बाद में राज्य सरकार ने इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया।
नब्बे के दशक में बिहार के कई जिलों में नरसंहार का दौर प्रारंभ हुआ था, जिसमें सबसे बड़ा दिसंबर 1997 में हुआ जहानाबाद जिले के लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार था। इसमें 58 दलितों की हत्या कर दी गई थी।
गौरतलब है कि इस मामले में न्यायालय ने 18 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि ब्रह्मेश्वर साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया।
बिहार में करीब 277 लोगों की हत्या से सम्बंधित 22 अलग-अलग नरसंहारों में मुखिया को आरोपी बनाया गया था, जिसमें धीरे-धीरे कर 16 मामलों में उसे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। जबकि छह अन्य मामलों में वह जमानत पर था। हाल ही में ब्रह्मेश्वर को बथानी टोला नरसंहार में बरी किया गया था।
गौरतलब है कि ब्रह्मेश्वर पर राज्य सरकार ने पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। उसे 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्जीबिशन रोड से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। करीब नौ वर्ष बाद ब्रह्मेश्वर 10 जुलाई 2011 को न्यायालय के आदेश के बाद जेल से बाहर आया।
जेल से बाहर आने के बाद पांच मई 2012 को ब्रह्मेश्वर ने भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से एक संगठन बनाया और कहा कि अब वह किसानों की हित की लड़ाई एक बार फिर लड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्मेश्वर के साक्ष्य के अभाव में अधिकांश मामलों में बरी हो जाने के बाद वर्तमान सरकार पर भी उसकी मदद करने का आरोप लगने लगा था।
पासवान की मांग, ब्रह्मेश्वर हत्याकांड की हो CBI जांच
पटना, एजेंसी
First Published:01-06-12 02:23 PM
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लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की निंदा करते हुए शुक्रवार को इस घटना की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
     
पासवान ने कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की सीबीआई से जांच होनी चाहिए। उनकी हत्या की घटना निंदनीय है। लोकतंत्र में हिंसा को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
     
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के सुशासन में विधि व्यवस्था में लगातार गिरावट आती जा रही है। आपराधिक घटनाओं की संख्या में लगातार बढ रही है इसलिए विधि व्यवस्था खराब होने को लेकर मुख्यमंत्री को अपने पद से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। पुलिस मुख्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर घटनाओं की संख्या में बढोतरी की बात स्वीकार की गयी है।
     
पासवान ने लचर कानून व्यवस्था और अपराधियों के बढते हौसले को लेकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालात सामान्य होने पर मैं मतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिए ब्रह्मेश्वर मुखिया के घर पर जाउंगा।

एकात्म मानवतावाद

कुछ विद्वान मित्रों का मानना है कि भाजपा की तरफ आम लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है और वह इसलिए कि उन लोगों के मन में उनमें  हिंदू होने का म...