शुक्रवार, 17 जून 2011

संपन्न वर्ग (क्रीमी लेयर)



(से साभार)
आरक्षण से अपवर्जित वे व्यक्ति/वर्ग जो समाज में संपन्न वर्ग हैं
संपन्न वर्ग (क्रीमी लेयर)
श्रेणी का विवरणजिन पर अपवर्जन का नियम लागू होगा
सांविधानिक पदनिम्नलिखित के पुत्र और पुत्रियां
क) भारत के राष्ट्रपति
ख) भारत के उप-राष्ट्रपति
ग) उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश
घ) संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
ड.)वे व्यक्ति जो इसी प्रकार के सांविधानिक पदों पर हैं ।
॥ सेवा की श्रेणी
क) अखिल भारतीय केंद्रीय और राज्य सेवाओं के ग्रुप क/श्रेणी । के अधिकारी
(सीधी भर्ती)
निम्नलिखित के पुत्र और पुत्रियां
क) जिनके माता-पिता, दोनों श्रेणी-। के अधिकारी हों
ख) जिनके माता-पिता में से कोई भी श्रेणी-1 का अधिकारी हो
ग) जिनके माता-पिता दोनों श्रेणी-। के अधिकारी हों परंतु उनमें से किसी की भी मृत्यु हो जाए या वह स्थायी रुप से अशक्त हो जाए
घ) जिनके माता-पिता में से कोई भी श्रेणी-। का अधिकारी हो और माता-पिता की मृत्यु हो जाए या स्थायी रुप से अशक्त हो जाए तथा मृत्यु से या ऐसी अशक्तता से पूर्व संयुक्त राष्ट्र संघ (यू एन) अंर्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई एम एफ), विश्व बैंक आदि जैसे किसी अंर्तराष्ट्रीय संगठन मे ं कम से कम 5 वर्ष की सेवा की हो
ड.) जिनके माता-पिता दोनों श्रेणी-। के अधिकारी हैं एवं उनकी मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रुप से अशक्त हो जाते हैं और इस प्रकार मृत्यु या अशक्तता से पूर्व दोनो ं में या किसी भी एक ने किसी अंर्तराष्ट्रीय संगठन जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ, अंर्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक आदि में कम से कम 5 वर्ष की सेवा की हो
परंतु निम्नलिखित मामलों में अपवर्जन का नियम लागू नहीं होगा:-
क) उस माता-पिता के पुत्र और पुत्रियां जिनमें से कोई एक या दोनों श्रेणी-। के अधिकारी हैं और उनके माता या पिता की मृत्यु या दोनों की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रुप से अशक्त हो/हों
ख) अन्य पिछड़े वर्ग की श्रेणी की कोई भी महिला जिसका विवाह श्रेणी-। के अधिकारी से हुआ हो और वह स्वयं नौकरी के लिए आवेदन करना चाहती हो ।
ख) केंद्र और राज्य सेवाओं के ग्रुप ख/श्रेणी-॥ के अधिकारी (सीधी भर्ती)निम्नलिखित के पुत्र(पुत्रों) और पुत्री (पुत्रियों) पर -
क) जिनके माता-पिता, दोनों श्रेणी-॥ के अधिकारी हों,
ख) जिनके माता-पिता में से केवल पिता श्रेणी-॥ का अधिकारी हो और 40 वर्ष की आयु का होने पर या इससे पूर्व श्रेणी-। का अधिकारी हो
ग) जिनके माता-पिता दोनों श्रेणी-॥ के अधिकारी हों और उनमें से किसी की भी मृत्यु हो जाए या वह स्थायी रुप से अशक्त हो जाए और उनमें से किसी ने भी मृत्यु से या अशक्तता से पूर्व अंर्तराष्ट्रीय संगठन जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक आदि में कम से कम 5 वर्ष की सेवा की हो
घ) माता-पिता में से पिता श्रेणी-। का अधिकारी हो (40 वर्ष की आयु से पूर्व सीधी भर्ती से पदोन्नत हुआ हो) और पत्नी श्रेणी-॥ की अधिकारी हो और पत्नी की मृत्यु हो गई हो या स्थायी रुप से अशक्त हो जाए और
ड) जिनके माता-पिता मे से माता प्रथम श्रेणी अधिकारी हो (सीधी भर्ती अथवा 40 वर्ष की उम्र से पहले पदोन्नत) और पिता द्वितीय श्रेणी का अधिकारी हो और पिता की मृत्यु हो जाए अथवा स्थायी रुप से अशक्त हो जाए ।
किंतु अपवर्जन का नियम निम्नलिखित मामलों में लागू नहीं होगा:-
उन माता-पिता के पुत्र व पुत्रियां:-
(क) जिनके माता-पिता दोनो द्वितीय श्रेणी अधिकारी हों और उनमें से किसी एक की मृत्यु हो जाए अथवा स्थायी रुप से अशक्त हो जाए ।
(ख) जिनके माता-पिता, दोनो द्वितीय श्रेणी अधिकारी हों और दोनों कीद्न मृत्यु हो जाए अथवा स्थायी रुप से अशक्त हो जाए किंतु उनमे से कोई एक ऐसी मृत्यु या अशक्तता से पहले कम से कम 5 वर्ष की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक आदि जैसे किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन में नियोजित रहे ।
(ग) सार्वजनिक क्षेत्र के उपकमों के कर्मचारीइस श्रेणी में उपर्युक्त ' क ' और ' ख ' में उल्लिखित मानदंड आवश्यक परिवर्तनों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपकमों, बैंकों, बीमा संगठनों, विश्व विद्यालयों आदि में समतुल्य अथवा समकक्ष पदों पर कार्यरत अधिकारियों और निजी क्षेत्र में समतुल्य अथवा समकक्ष पदों पर कार्यरत अधिकारियों पर भी लागू होंगे । इन संस्थानों में समतुल्य अथवा समकक्ष पदों का मूल्यांकन होने तक उक्त संस्थान के अधिकारियों पर नीचे उल्लिखित वर्ग VI में विनिर्दिष्ट मानदंड लागू होंगे ।
III. अर्ध-सैनिक बलों सहित सस्त्र बल (इसमें सिविल पदधारी व्यक्ति शामिल नहीं हैं)ऐसे माता-पिता के पुत्र और पुत्री (पुत्रियां) जिनमें से कोई एक या दोनों सेना में कर्नल या उससे उच्च रैंक में हैं और नौसेना और वायु सेना और अर्ध-सैनिक बलों में समतुल्य पदों पर हैं, किंतु:-
(i) यदि किसी शस्त्र बल के अधिकारी की पत्नी सशस्त्र बल में कार्यरत है(अर्थात विचाराधीन वर्ग में) तो उस पर अपवर्जन का नियम केवल तब लागू होगा जब वह कर्नल रैंक में आएगा ।
(ii) पति और पत्नी के सेवा रैंक यदि कर्नल से नीचे का हो तो उन्हें आपस में जोडा नहीं जाएगा ।
(iii) यदि सशस्त्र बल में कार्यरत किसी अधिकारी की पत्नी सिविल सेवा में हो तो अपवर्जन का नियम लागू करने के लिए इस तब तक शामिल नहीं किया जाएगा जब तक वह मद संख्या II में उल्लिखित सेवा वर्ग में नहीं आती है और इस स्थिति में उस पर स्वतंत्र रुप से उसमें उल्लिखित मानदंड और शर्र्ते लागू होंगी ।
(IV) व्यावसायिक श्रेणी,
व्यापार और उद्योग में कार्यरत व्यक्ति, डाक्टर,वकील, चार्टर्ड अकाउन्टेंट, आयकर परामर्शदाता वित्त या प्रबंध परामर्शदाता, दंत सर्जन,इंजीनियर,वास्तुकार, कंप्यूटर विशेषज्ञ, फिल्म कलाकार और अन्य फिल्म व्यवसायों , लेखक,पटकथा लेखक, खेलकूद से संबंधित व्यवसायी, मीडिया व्यवसायी के रुप में कार्यरत व्यक्ति या इसी प्रकार की हैसियत के किसी अन्य व्यवसाय में लगे व्यक्ति व्यापार,कारबार और उद्योग में कार्यरत व्यक्ति
श्रेणी- VI के सामने दर्शाया गया मानदंड लागू होगा ।
स्पष्टीकरण
I )जहां पति किसी व्यवसाय में है और पत्नी श्रेणी-॥ या निचले ग्रेड में नियोजित है तो आयकर पति की आय के आधार पर ही लगेगा ।
॥) यदि पत्नी किसी व्यवसाय में है और पति श्रेणी-॥ या निचले ग्रेड में नियोजिति है, तब आय/धन का मानदंड पत्नी के आय के आधार पर लागू होगी और पति की आय को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा ।
सम्पत्ति के स्वामी
क) जोत क्षेत्र
निम्नलिखित का स्वामित्व रखने वाले परिवार (पिता, माता और अवयस्क बच्चे) से संबंधित व्यक्तियो के पुत्र और पुत्री (पुत्रियां)-
क) केवल सिंचित भूमि जो सांविधिक उच्चतम सीमा क्षेत्र के बराबर है या 85 % से अधिक है, या
ख) सिंचित और गैर सिंचित दोनो प्रकार की भूमि, इस प्रकार है :-
1) अपवर्जन का नियम वहां लागू होगा जहां पूर्व शर्त हो कि सिंचित क्षेत्र (डीनोमिनेटर) जो कि एक ही व्यक्ति के नाम मे हो 40 % या सांविधिक उच्चतम सीमा से अधिक सिंचित क्षेत्र (गैर सिंचित हिस्से को हटाकर इसकी गणना की जाती है ) हो यदि 40 % तक की पूर्व-शर्त हो तब केवल गैर-सिंचित क्षेत्र की गणना की जाएगी । ऐसा विद्यमान परिवर्तन फार्मूले के आधार पर गैर सिंचित भूमि को सिंचित प्रकार की भूमि मे परिवर्तित करके किया जाएगा । गैर-सिंचित भूमि से इस प्रकार परिकलित सिंचित क्षेत्र, सिंचित भूमि के वास्तविक क्षेत्र में जोडा जाएगा और यदि बाद में इस प्रकार जोड देने पर सिंचित भूमि का कुल क्षेत्र 85 % है या सिंचित भूमि के लिए सांविधिक उच्चतम सीमा से अधिक है तब अपवर्जन नियम लागू होगा और अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा
2) अपवर्जन यदि परिवार का खेत पूर्णतया असिंचित है तो नियम लागू नहीं होगा ।
ख) बगान
1) कॉफी, चाय, रबर आदि
2) आम, सिट्रस (नींबू आदि), सेब के बागान आदि
नीचे श्रेणी- v । मे दी गई आय/धन का मानदंड लागू नहीं होइन्हे जोत क्षेत्र माना जाता है इसलिए
इस श्रेणी के अधीन उपर्युक्त ' क ' में दिया मानदंड लागू होगा । नीचे श्रेणी ख-1 में दिया मानदंड लागू होगा
ग) नगर बस्तियो में खाली भूमि और/या भवनस्पष्टीकरण:- भवनों का आवासीय, औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रयोजन या इसी प्रकार के दो या अधिक ऐसे प्रयोजनो के लिए उपयोग किया जाए ।
VI आय/धन करपुत्र, पुत्री (पुत्रियां)
क) जिन व्यक्तियों की सकल वार्षिक आय 2 5 लाख रुपए है या इससे अधिक है या जिनके पास लगातार तीन वर्ष से धन कर अधिनियम मे यथा निर्धारित छूट सीमा से अधिक धन है ।
ख) श्रेणी I, II, III और V- क से संबंधित व्यक्ति जिन्हे आरक्षण के अधिकार से वंचित नहीं किया गया है परंतु जिनकी आय का कोई अन्य स्त्रोत है जो उपर्युक्त उल्लिखित (क) मे दिए गए आय के मानदंड मे आएंगे ।
स्पष्टीकरण:-
1) वेतन या कृषि योग्य भूमि से प्राप्त आय को मिलाया नही जाएगा ।
2) रुपए के संबंध में आय का मानदंड प्रत्येक तीन वर्ष मे इसके मूल्य मे ं परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आशोधित किया जाएगा । परंतु यदि स्थिति के अनुसार ऐसी मांग हो तो अंतराल को कम किया जा सकता है ।
स्पष्टीकरण:-
इसमें जहां भी स्थायी अशक्तता शब्द आया है वहां इसका अभिप्राय उस अशक्तता से है जिसके परिणामस्वरुप अधिकारी को सेवा से निकाला जा सकता है ।
उत्तर प्रदेश की पिछड़ी जातियां -

अन्य पिछड्ा वर्ग की केन्द्रीय सूची
     
क्रम सं0 जातियों/उप-जातियों तथा संबंधित वर्गों के नाम    
केन्द्रीय सूची मंे प्रविश्ट संख्या
 
उत्तर प्रदेष
1  अहेरिया/अहोरिया 68
2  अहिर, यादव  1
3  अरख, अरकवंषीय 2
4  आतिषबाज, दारूगर 61
5  बैरागी 33
6  बंजारा, कुकेरी, रांकी, मेकरानी 30
7  बरहई, बधई, विष्वकर्मा, रामगढि़या 31
8  बारी 32
9  बिंद 34
10  बियार 35
11  भांड  64
12  भर 36
13  भटियारा 38
14  भुरजी, भड़भूजा, भड़भूंजा, भूज, कंडु 37
15
बोट (बोटिया के अलावा जो उत्तर प्रदेष में अनुसूचित जनजाति में पहले से ही
षामिल हैं)
69
16  छिपी, छिपे 18
17  चिकवा, कस्साब (कुरैषी) कसाई/कास्साई चाक 17
18  दफाली 21
19  दर्जी 24
20  धीवर,धीवेर 25
21
धेबी (उनको छोड़कर जो पहले ही उत्तर प्रदेष की अनुसूचित जातियों की सूची
में षामिल हैं)
55
22  दोहर  72
23  फकीर 29
24  गडेरिया 14
25  गद्दी, घोसी 15
26  गिरी 16
27  गोसांई 12
28  गूजर 13 29  हज्जाम (नाई) सलमानी, नाई, सैन (नाई) 53
30  हलालखोर, हेला, लालबेगी (जो अनुसूचित जाति में हैं, उनको छोड़कर) 54
31  हलवाई  52
32  झोजा 20
33  जोगी 19
34  काछी, काच्छी-कुषवाहा, षाक्या 3
35  कहार, तंवर सिंघारिया 4
36  कलाल, कलवार, कलार 71
37  कासगर  10
38  कसेरा, ठठेरा, ताम्राकर, कलईकर 73
39  केवट या मल्लाह 5
40  खुम्रा, संगतराष, हंसिरी 59
41  किसान 6
42  कोईरी/कोइरी 7
43  कोष्ता/कोष्ती 58
44  कुम्हार, प्रजापति 8
45  कुंजड़ा या रायीन 11
46  कुर्मी , कुर्मी-सैंथवार/कुर्मी-माल्ल 9
47  कुथालिया बोरा अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ बागेष्वर या नैनीताल जिलों से संबंधित 70
48  लोध, लोधा, लोध्ी, लोध्ी-राजपूत 48
49  लोहार, लुहार, सैफी 49
50  लोनिया, नोनिया, लुनिया, गोले ठाकुर, नुनेरे 50
51  मदारी 62
52  माली, सैनी, बागबान  39
53
मनिहार, काचेर, लखेड़ा (टिहरी गढ़वाल क्षेत्र की लखेड़ा ब्राहमण उपजाति को
छोड़कर), चूड़ीहार
40
54  मारछा  46
55  मेवाती, मेव 56
56  मिरासी 43
57
मोची जो उत्तर प्रदेष की अनुसूचित जातियों की सूची में षामिल हैं, उनको
छोड़कर)
65
58  मोमिन (अंसार, अंसारी), जुलाह 42
59  मुराव-या मुराई मौर्य 41
60  मुस्लिम कायस्थ 44
61  नद्दफ (धुनिया), मंसूरी, बेहना, कंडेरे, कडेरे, पिंजारा 45
62  नालबंद, सैस 63 63  नक्काल 26
64  नायक 28
65  नट (जो अनुसूचित जातियों की सूची में षामिल है, उनको छोड़कर) 27
66
पटवा, पटुआ, पाथर (अग्रवाल देवबंसी, खरेवाल या खंडेलवाल जो बनिया
उपजातियां हैं, इसमें षामिल नहीं है और खारवार जो राजपूत जाति है, भी इसमें
षामिल नहीं है), ततवा
60
67  रा-सिक्ख (महातम) 74
68  राज (मेमार) 66
69  रंगरेज, रंगवा 47
70  सक्का-भिष्ती, भिष्ती-अब्बासी 57
71  षेख सरवारी (पिराई), पिराही 67
72  सोनार, सुनार  51
73  तमोंली, बरई, चैरसिया 22
74  तेली, समानी, रोगनगर, तेली-मलिक (मुस्लिम), तेली, साहू, तेली राठौर
      स्पश्टीकरणः उन जातियों को जिन्हें धर्म के नाम के विषेश उल्लेख्,ा के साथ
      प्रविश्ट किया गया है, को छोड़कर उत्तर प्रदेष की उपर्युक्त सूची में परंपरागत
      पुष्तैनी धंधों से संबंधित सभी जातियों को षामिल किया गया है, चाहे उनसे
      संबंकिधत व्यक्ति हिंदू, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म के अनुयायी हों ।
23
75  उनायी साहु  75

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