मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

अतः अन्ना का आना अभी "शुभ नहीं है"


डॉ.लाल रत्नाकर 
एक शिक्षक और कलाकार

बोया पेड़ बबूल का -आम कहाँ से खाय |
अन्ना जी का उत्तर प्रदेश जाना अभी शायद जल्दबाजी का काम है, जब पूरे देश से भ्रष्टाचार मिट जायेगा तो इस पिछड़े राज्य से भी मिट ही जायेगा . आखिर  बहन जी का उत्तर प्रदेश पर राज्य करना देश की पहली दलित प्रयोगशाला है, इसमे 'भ्रष्टाचार की बात भी बेमानी लगती है क्योंकि बेईमानों को हटाकर बिना बेईमानी के कैसे राज करेंगी' भ्रष्टाचार के आगोश में जब पूरा देश डूबा हो तो बहन जी का भ्रष्टाचार समुद्र में बूंद जैसा ही है.पर आज जिस तरह से 'भ्रष्टतम' समाज पैदा हो गया है उसका क्या होगा ? उसका ठीकरा प्रदेश के जन जन तक पर फोड़ा जा रहा है पर भ्रष्ट बिलकुल अलग और पुराने तरीके से ही लगे हैं. पहले उदारीकरण तो था नहीं आजकल भ्रष्टाचार में भी उदारता बरती जा रही है, फला फला के लिए  आज़ादी है, फला फला के लिए उसमें जेल, इसका इलाज कैसे होगा. यदि उत्तर प्रदेश में इनका यही हाल रहा तो बाकि के प्रदेश का क्या हश्र होगा. त्रिपाठी जी ने इशारे इशारे में ही उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व और वर्तमान पर इशारा किया पर अभूतपूर्व दलों की ओर इशारा तक नहीं किया है. पूरे प्रदेश में सिस्टम के नाम पर बहु बेटियों तथा निक्कमे स्वजातियों को बैठाये हुए है हर जगह, जिसका अदृश्य रूप जब जब सबके सामने आता है तो दिखाई देता है कि घोर भ्रष्टाचार और अत्याचार में लम्बे समय से डूबा है यह प्रदेश. लेकिन पुलिस की भर्ती में धांधली की आवाज़ तो हाई कोर्ट तक जाती है, पर सारी भर्तियों में - जातीय निक्कमों की फौज की फौज - सारे सरकारी दफ्तरों , विद्यालयों , विश्वविद्यालयों में थोक में है पर उनपर न तो मिडिया नज़र उठाता है और न अन्ना हजारे निकलते हैं सुधार के लिए "दलित राज्य की उपलब्धियों को नकारने का मतलब तो समझ में आता ही होगा" पर सारी उपलब्धियों का श्रेय "द्विज" शक्तियों को देना बहुत बड़ी साजिश है भ्रष्टाचार को बनाये रखने की.
अतः अन्ना का आना अभी "शुभ नहीं है"
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अन्ना मामले पर शिक्षकों की नाराजगी

रामदत्त त्रिपाठी

अन्ना
अन्ना हज़ारे यूपी का दौरा करने वाले हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ मुहिम चलाना चाहते हैं.


लखनऊ यूनिवर्सिटी के कुलपति द्वारा ने विश्वविद्यालय शिक्षक संघ को अन्ना हजारे के स्वागत में सभा करने और विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस में रुकने देने की अनुमति रद्द कर देने की शिक्षक और कर्मचारी संघ में तीखी प्रतिक्रिया हुई है.
समझा जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार के दबाव में यह कदम उठाया है.
लखनऊ विश्विद्यालय शिक्षक और कर्मचारी संघ प्रशासन के फैसले से बहुत नाराज है. दोनों संगठनों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई.
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डाक्टर दिनेश कुमार ने बताया कि वे और उनके साथी कुलपति प्रोफ़ेसर मनोज कुमार मिश्र से मिले थे और उनसे मालवीय सभागार में सभा कर लेने देने का अनुरोध किया. मगर कुलपति नही माने.
प्रशासन द्वारा एस सम्बन्ध में असहमति व्यक्त करने के कारण अतिथि गृह में कक्ष उपलब्ध कराना संभव नही है
मनोज दीक्षित, प्रोफेसर
डाक्टर दिनेश कुमार के अनुसार कुलपति ने कहा कि वह इस तरह का विवादास्पद कार्यक्रम नहीं होने देंगे.
दिनेश कुमार के मुताबिक़ इससे पहले उन्हें मालवीय सभागार में सभा की अनुमति दी गयी थी और उन्होंने उसके लिए आवश्यक धन राशि भी जमा कर दी थी.
शिक्षक संघ के अनुसार मालवीय सभागार के अलावा अन्ना हजारे तथा उनके साथियों किरण बेदी, स्वामी अग्निवेश और अरविन्द केजरीवाल आदि के रुकने के लिए विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस देने से भी मना कर दिया गया है. गेस्ट हाउस के इंचार्ज प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने इसकी पुष्टि की है.
मनोज दीक्षित ने शिक्षक संघ को लिखे एक पत्र में बताया है कि, ''प्रशासन द्वारा एस सम्बन्ध में असहमति व्यक्त करने के कारण अतिथि गृह में कक्ष उपलब्ध कराना संभव नही है.''
विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष जगदीश सिंह और महामंत्री राकेश यादव भी अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित थे.
लखनऊ विश्विद्यालय परिसर गोमती नदी के किनारे झूले लाल मैदान के पास है , जहां पहली मई को अन्ना हजारे की जन सभा होनी है.
विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने इस आम सभा से पहले मालवीय सभागार में स्वागत कार्यक्रम रखा था. इसके बाद विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र अन्ना हजारे की रैली में भी शामिल होने वाले थे.
इस घटना से मै बहुत आहत हूँ. आपने कार्य परिषद को भी विशवास में लेना उचित नही समझा. आपका यह कृत्य विश्विद्यालय की स्वायत्तता व् अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है.
अनिल सिंह, प्रोफेसर
विश्विद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य अनिल कुमार सिंह ने कुलपति के फैसले की निंदा की है.
अनिल कुमार सिंह ने कुलपति को लिखे एक पत्र में कहा कि, ‘‘इस घटना से मै बहुत आहत हूँ. आपने कार्य परिषद को भी विशवास में लेना उचित नही समझा. आपका यह कृत्य विश्विद्यालय की स्वायत्तता व् अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है. आपके निर्णय से विश्विद्यालय की गरिमा को अपार क्षति हुई है.’’
अनिल कुमार सिंह ने याद दिलाया है कि इसके पहले जय प्रकाश नारायण , वीपी सिंह एवं अन्य सामाजिक राजनीतिक नेताओं की सभाएं विश्विद्यालय परिसर में होती रही हैं.
शिक्षक संघ के महासचिव डाक्टर आरबी सिंह का कहना है कि कुलपति के इस निर्णय को एक चुनौती के रूप में लिया गया है.
अब शिक्षक और छात्र भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के आन्दोलन में ज्यादा सक्रियता से काम करेंगे. उनका कहना है अन्ना हजारे के जाने के बाद शिक्षक संघ इस मसले पर अपनी आम सभा की बैठक बुलाएगा.
कुलपति प्रोफ़ेसर मनोज कुमार ने फोन नहीं उठाया लेकिन गेस्ट हॉउस के इंचार्ज प्रोफ़ेसर मनोज दीक्षित ने सभागार और गेस्ट हॉउस का आरक्षण रद्द करने के निर्णय की पुष्टि की है
प्रेक्षकों का कहना है कि लखनऊ विश्विद्यालय के इस निर्णय से साफ़ है कि मायावती सरकार अन्ना हजारे के उत्तर प्रदेश दौरे से काफी असहज महसूस कर रही है.

(बी बी सी हिंदी से साभार)

वाह कुलपति महोदय आपने कर दिया कमाल !

विवि में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में आप 'भ्रष्टाचारियों के साथ'

लविवि में अन्ना के लिए जगह नहीं

Apr 27, 03:01 am
-बुकिंग के बाद मालवीय सभागार और अतिथि गृह देने से किया इंकार
-विवि में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को झटका
लखनऊ, 26 अप्रैल (संवाद सूत्र) : भ्रष्टाचार के खिलाफ देश को एकजुट करने वाले गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में कोई जगह नहीं है। शिक्षक भले ही अन्ना को बुला कर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को बल देना चाहते हों लेकिन लविवि प्रशासन के लिए यह महज 'विवादित' कार्यक्रम है और ऐसा कोई कार्यक्रम वह अपने यहां कराने को राजी नहीं है। इसी वजह से विवि प्रशासन ने परिसर स्थित मालवीय सभागार व अतिथि गृह की पहली मई की उस बुकिंग को भी निरस्त कर दिया, जिसे शिक्षकों ने अन्ना के लिए आरक्षित कराया था।
मंगलवार को बुकिंग निरस्त होने की सूचना आने के बाद कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्र से मिलने गए लूटा पदाधिकारियों ने मुलाकात के बाद बताया कि कुलपति ने परिसर में किसी भी 'विवादित' कार्यक्रम की अनुमति देने से मना कर दिया है। शिक्षकों के मुताबिक वे अन्ना का स्वागत करना चाहते हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं है। शिक्षकों का आरोप है कि निर्धारित कार्यक्रम के दौरान मंच पर कुलपति, कुलसचिव और प्रतिकुलपति के लिए कोई स्थान नहीं रखा गया था, लिहाजा यह कार्यवाही द्वेष की भावना से की गई है।
लूटा के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार और महामंत्री डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि अन्ना से कार्यक्रम की स्वीकृति मिलने पर एक मई के लिए बीती 23 अप्रैल को मालवीय सभागार बुक कराया गया था। इसके लिए निर्धारित पांच सौ रुपये का भुगतान भी कैशियर कार्यालय में कर दिया गया था। आमंत्रित अतिथियों में अन्ना हजारे, स्वामी अग्निवेश, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल को ठहराने के लिए अतिथि कक्ष के छह कमरे दिए जाने की स्वीकृति भी विवि प्रशासन ने दे दी थी। शिक्षक कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे थे कि इसी बीच लविवि प्रशासन ने उन्हें मालवीय सभागार की बुकिंग रद करने की सूचना भेज दी।
विवि के निर्णय के खिलाफ कार्यपरिषद सदस्य अनिल सिंह, लविवि शिक्षक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष दिनेश कुमार, महामंत्री आरबी सिंह और कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने प्रेसवार्ता कर कुलपति की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। शिक्षकों ने कहा कि एक मई के बाद बैठक कर विवि प्रशासन के इस फैसले के विरोध में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
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''कार्यपरिषद सदस्य और जिम्मेदार नागरिक के नाते इस समाचार से आहत हूं। कुलपति ने एकतरफा फैसला लिया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता और विवि की गरिमा के विरुद्ध है।''
अनिल सिंह, कार्यपरिषद सदस्य
लखनऊ विश्वविद्यालय
''अन्ना हजारे के आगमन से विवि में होने वाली भीड़ को देखते हुए उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था। किसी तरह की दुर्घटना से बचने के लिए कार्यक्रम रद किया गया है।''
प्रो.एसके द्विवेदी,प्रवक्ता,लखनऊ विश्वविद्यालय


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