बुधवार, 19 जनवरी 2011

मायावती ने मंत्री को बर्ख़ास्त किया


रामदत्त त्रिपाठी

मायावती पार्टी अनुशासन पर विशेष ध्यान देती हैं
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भूमि विकास एवं जल संसाधन मंत्री अशोक कुमार दोहरे को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है. उन्हें पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया है.
मायावती की बहुजन समाज पार्टी(बीएसपी) की एक विज्ञप्ति के अनुसार राज्यपाल बी एल जोशी ने मुख्यमंत्री की सिफ़ारिश पर दोहरे को पदमुक्त कर दिया है.
विज्ञप्ति में ये ब्योरा नहीं है कि किस आधार पर दोहरे के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है. सिर्फ़ इतना कहा गया है कि दोहरे 'मंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण कर रहे थे.'
उल्लेखनीय है कि दोहरे बीएसपी के संस्थापक कांशी राम द्वारा शुरू किए गए संगठन बामसेफ के नेता थे.
पिछले चुनाव में निर्वाचित होकर वह विधायक हुए और मंत्री बने.
लेकिन हाल ही में बीएसपी ने उनके निर्वाचन क्षेत्र औरैया से उनका टिकट काट कर एक अन्य पार्टी नेता आलोक वर्मा को उम्मीदवार घोषित कर दिया था.

'बग़ावत'

औरैया से एक स्थानीय पत्रकार के अनुसार टिकट काटने से दोहरे बग़ावत पर उतर आए थे. उनके समर्थक रोज़-रोज़ बीएसपी के ख़िलाफ़ बयान दे रहे थे.
बीएसपी नेतृत्व ने पहले उनके चाचा मुलायम सिंह दोहरे एवं अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को दल से निकाला . लेकिन इससे औरैया में पार्टी के ख़िलाफ़ बग़ावत थमी नहीं.
समझा जाता है कि इसीलिए दोहरे को मंत्रिमंडल से बर्खास्त और फिर पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया.
दोहरे का फ़ोन बंद है, इसलिए उनकी प्रतिक्रिया नही मिल सकी.

दिशा चैंबर का इस्तीफ़ा

अभी दो दिन पहले ही उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की उपाध्यक्ष दिशा चैंबर ने अपने पद और पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था.
दिशा एक सीनियर दलित आईएएस अधिकारी जेएन चैंबर की बेटी हैं. वह कांग्रेस छोड़कर बीएसपी में आई थीं .
लेकिन एक स्थानीय अख़बार से बातचीत में दिशा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री मायावती का सम्मान करती हैं लेकिन बीएसपी पार्टी के अंदर अपनी बात कहने की बिल्कुल आज़ादी नहीं है इसलिए वह ख़ुद को पार्टी में रहने के लिए अनफ़िट मानती हैं.
दिशा का बयान छपने के बाद बीएसपी ने एक प्रेस नोट जारी करके उन्हें पद और पार्टी की सदस्यता से बर्खास्त करने की घोषणा कर दी.
दलित अफ़सर और उनके परिवार बीएसपी की बुनियाद रहे हैं. लेकिन हाल ही में कई दलित अफ़सर बीएसपी के बजाए दूसरे दलों में चले गए हैं. इनमे मुख्यमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव पी एल एक प्रमुख उदाहरण हैं.
प्रेक्षकों का कहना है कि बीएसपी की बदली नीति से दलित बुद्धिजीवी पार्टी से निराश हो रहें हैं.

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