शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

फैसले से मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहा: मुलायम


Oct 02, 02:23 am


(मुलायम सिंह यादव मुसलमानों के रहनुमा तो है ही यह बात कोई नई नहीं है पर इनकी इस छबि पर ग्रहण लगाने के इरादे काम कर चुके है सो आशंका तो खड़ी ही होती है की क्या यह नए सिरे से उन तेवरों के साथ खड़े हो पायेंगे जिसके लिए इन्हें 'मुल्ला मुलायम का नाम मिला था' इस पर ठीक से अमर सिंह ही बता सकते है, पर इतना तो तय है की हिंदुस्तान का मुसलमान जिन आक्रोसों का मुकाबला कर रहा है वह उसे इस देश पर भरोसे के लायक नहीं छोड़ रहा है. भले ही दबे मान से ही सही मुलायम सिंह ने यह बात स्वीकार की हो की इंसाफ नहीं हुआ है , यह बात जायज़ है 'राम लला हिन्दू आस्था के प्रतीक हो सकते है' पर उनका इस्तेमाल ईंट पत्थर की तरह करना बेमानी ही है, सच्चाई तो यही है की उनकी मूर्तियाँ वहां इसी तरह से पहुचाई गयी थी जैसे यह फैसला आया है . यह बात और घातक हो जाती है जब फैसले में एक मुसलमान एक ब्राह्मण और एक बनिया जज नियुक्त किया गया हो 'दिलीप मंडल की यह बात की जजों के बारे में कुछ भी कहना न्यायालय की अवमानना नहीं है,' अतः यह तो तय है की जो कुछ भी किया गया है सोच समझकर देश को फिर एकबार गुमराह करने के लिए किया गया है .
यहाँ यह बात उतनी ही प्रासंगिक है जीतनी मंडल के समय कमंडल का हमला आज फिर एक उसी तरह का झमेला खड़ा कर दिया था 'पिछड़ी जातियों की संख्या की गिनती करने की, समझदार मंत्री समूह आँखों में धूल तो डाल ही गया है यादवों के तीनों पहलवानों को और उनके जुटाए पिछड़ों के नेताओं की आँखों में, पर इनकी नियति को पहचानिए -
१.गृहमंत्री पी.चिदंबरम का बयान 'बाबरी विध्वंश के मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा...
२.प्रधान मंत्री का बयान 'धैर्य धारण करें'.
आज यही मुलायम सिंह अपनी समाजवादी विचारधारा को तार तार करने के बाद जिस चिंता को कर रहे है वह अब उतनी पैनी नहीं रही, बात तो हज़ार नहीं लाख टके की है की 'फैसला' ठीक नहीं हुआ है और इसका खुलासा सुप्रीम कोर्ट करेगा उम्मीद की एक लकीर मात्र ही है .
चलिए कम से कम मुलायम सिंह यादव ने यह स्वीकार किया कि मुसलमान पशोपेश में है ?
मै  कई मुसलमानों से बातचीत में पाया कि कहीं न कहीं गड़बड़ है .
डॉ.लाल रत्नाकर 
खबर दैनिक जागरण से साभार )
लखनऊ, जागरण ब्यूरो। 'अयोध्या विवाद का हल आपसी बातचीत से निकले या फिर न्यायालय निकाले।' अब तक यह राय रखने वाली समाजवादी पार्टी शुक्रवार को नया रुख अख्तियार करती नजर आयी। पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या फैसले की बाबत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा , 'इस फैसले से देश का मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहा है। पूरे समुदाय में मायूसी है।'
फैसले के दिन खामोशी अख्तियार करने वाली सपा ने शुक्रवार को चुप्पी तोड़ी। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने पार्टी मुख्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में एक पन्ने का लिखित बयान पढ़ कर और उसे जारी करते हुए अयोध्या फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मुलायम ने क्या कहा, उन्हीं की जुबानी :
'देश आस्था से नहीं संविधान एवं कानून से चलता है। यह बात मैने 1990 में तब कही थी, जब पूरे देश में अयोध्या पर आक्रमण की तैयारियां चरम सीमा पर थीं। मैने उस समय चेन्नई में सम्पन्न राष्ट्रीय एकता परिषद में बड़े दुखी मन से कहा था कि मेरी स्थिति महाभारत के अर्जन की तरह हो गयी है क्योंकि मुझे संविधान और कानून की रक्षा के लिए अपने ही लोगों पर सुरक्षाबलों से गोलियां चलवानी पड़ सकती है। मैंने टस से मस हुए बिना अपने कर्तव्य का पालन किया था।'
उन्होंने आगे कहा, 'कल अयोध्या पर फैसला आया। यह देख कर मुझे निराशा हुई है कि न्यायिक निर्णयों में आस्था को कानून और सुबूतों से ऊपर रख कर फैसला दिया गया है। यह देश के लिए, संविधान के लिए एवं न्यायपालिका के लिए अच्छा संकेत नही है। आगे चल कर इस निर्णय से अनेक संकट पैदा होंगे। इस फैसले से देश का मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहा है। पूरे समुदाय में मायूसी है। मैं समझता हूं कि वह पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में जायेगा जहां सुबूतों एवं कानून के आधार पर फैसला आयेगा जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।' सपा प्रमुख ने इसी के साथ पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया।
इससे पूर्व मुलायम सिंह यादव नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद अहमद हसन और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ सबेरे नदवा कालेज गये। वहां उन्होंने पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी से मुलाकात की। दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। माना जा रहा है दोनों में अयोध्या फैसले के बाबत ही विचार विमर्श हुआ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. वोटों की रोटी के कुत्ते हैं ये सब कमीने ....देश जाय भाड़ में इन्हें अपनी कुर्सी चाहिए

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  2. अच्छा ख्याल है मिश्र जी !

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