गुरुवार, 30 सितंबर 2010

न जाने कितने वीरपाल भूखमरी से जुझने को मजबूर




न जाने कितने वीरपाल शहादत देंगें इस गूंगी बाहरी व्यवस्था में, कहने को तो दलितों की मुखियां up की मुखियां है पर जो खेल उनकी आँखों के आगे चल रहा है सो भयावह है -साभार जागरण से

गढ़मुक्तेश्वर, संवाद सहयोगी : गरीब दलितों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र में अनेक दलित वीरपाल की तरह तंगहाली और बीमारी से परेशान होकर अपनी जिंदगी को बोझ की तरह ढो रहे हैं। बीपीएल का लाभ भी इन गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। इनमें से कई के कच्चे पक्के मकान बरसात में गिर गए तो अब उनके पास सिर छुपाने के लिए भी कोई साधन नहीं बचा है। फिर भी प्रशासन उदासीन बना हुआ है।
मुख्यमंत्री मायावती ने तीन साल पहले प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद 11 बिंदुओं पर योजना बनाकर अंबेडकर ग्राम योजना के तहत उसे लागू करने की घोषणा की। इन 11 बिंदुओं में गरीब व दलितों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए उन्हें बीपीएल योजना से जोड़ना भी शामिल था। बीपीएल कार्डधारक को इंदिरा आवास योजना, सस्ता राशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ निहित कर दिया गया। लेकिन जिन गरीब दलितों का जुगाड़ नहीं है उनके पास बीपीएल कार्ड भी नहीं हैं। वहीं सुविधा शुल्क लेकर अपात्र लोगों को बीपीएल कार्ड थमा दिए गए, जिसका लाभ साधन संपन्न लोग उठा रहे हैं। वहीं, दलित वीरपाल के तरह न जाने कितने लोग अपनी तंगहाली व बोझ बनी जिंदगी को ढो रहे हैं।
नगर के मोहल्ला अहाता बस्ती राम निवासी लीला अपने बीमार पति का इलाज कराते कराते तंगहाली में आ गई है और उसके पास आय का कोई साधन भी नहीं है। बरसात में उसका घर गिर गया। बीमार पति नैन सिंह व बेटी पूजा के साथ ही उसके पास सिर छुपाने की भी जगह नहीं बच पाई। इसी मोहल्ले के इंद्र प्रसाद पुत्र टीकाराम बीमार हैं। मजदूरी एक महीना से नहीं मिल पाई तो जिंदगी बोझ बन गई। विधवा धर्मवती की हालत भी ऐसी है, खेतों में पानी भरने के कारण उसे वहां काम नहीं मिल रहा है और वह तीन छोटे-छोटे बच्चे के साथ बदहाली के साथ है। परशुराम पुत्र सावलिया बीमार होने पर तंग हो गया। सेंगेवाला मोहल्ला निवासी मुखराम का पुत्र डूंगर बीमार है, ऊपर से उसे बंदर ने काट लिया। लेकिन सरकारी अस्पताल में उसे एक इंजेक्शन लगाकर भगा दिया गया। लेकिन प्राइवेट अस्पताल में वह इलाज नहीं करा सकता, क्योंकि उसे कई दिन से मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इन सभी परिवारों के पास बीपीएल कार्ड नहीं हैं तो सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। इसके चलते वे अपनी जिंदगी कीड़े मकोड़े की तरह जीने को मजबूर हैं। क्षेत्र के गांव दौताई, खिलवाई, लोदीपुर छपका व नया गांव इनायतपुर में मलिन बस्ती में गंदगी की भरमार है। तालाबों का गंदा सड़ा पानी दलितों के घरों में तीन महीने से घुसपैठ कर रहा है। बदबू में सांस लेना मुश्किल है। लेकिन वहां दलित रहने को मजबूर हें। खास बात यह है कि जिला अधिकारी, उप जिलाधिकारी व खंड विकास अधिकारी से ग्रामीणों ने बार-बार शिकायत दर्ज कराई। तीन दिन पहले बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सांसद नरेंद्र कश्यप ने बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया तो दौताई गांव में दलितों के घरों में पानी घुसने का मामला फिर से उठाया गया।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि वीरपाल ही नहीं न जाने कितने लोग लगातार भूख और बीमारी से तंग होकर मर रहे हैं या फिर आत्महत्या को मजबूर हैं

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